Rahu Chalisa | श्री राहु चालीसा: संपूर्ण पूजा विधि, स्तोत्र, कवच और उपाय

श्री राहु देव: चालीसा, स्तोत्र एवं संपूर्ण पूजन

राहु चालीसा क्या है?

राहु चालीसा, रहस्यमयी और प्रभावशाली राहु ग्रह को समर्पित एक भक्तिपूर्ण स्तोत्र है, जो 40 छंदों में रचित है। यह चालीसा राहु देव के रूप, शक्ति और असर का गुणगान करती है।

माना जाता है कि इसका नियमित पाठ राहु ग्रह के अशुभ प्रभावों को शांत करता है और जीवन में शांति, स्थिरता व सफलता लाता है। यह चालीसा नकारात्मक ऊर्जा, बुरी नजर, और अज्ञात बाधाओं से रक्षा करती है।

राहु चालीसा का पाठ क्यों करें?

राहु चालीसा का पाठ भक्तों के जीवन में शांति, स्थिरता और सफलता लाने का एक प्रभावशाली माध्यम माना जाता है। यह चालीसा राहु ग्रह के अशुभ प्रभावों को दूर करने और शुभ फल प्राप्त करने में सहायक होती है।

जिनकी कुंडली में राहु ग्रह अनुकूल नहीं होता, उन्हें जीवन में संघर्ष करना पड़ता है। राहु चालीसा का नियमित पाठ न केवल कालसर्प दोष को शांत करता है, बल्कि राहु देव की कृपा से धन, समृद्धि, आत्मबल और मानसिक शांति भी प्राप्त होती है।

श्री राहु चालीसा

॥ दोहा ॥
नमो नमो श्री राहु सुखकारी।
सभी कष्टों को हरने वाले, भक्तों को सुख देने वाले॥
जयति जयति श्री राहु महाराज।
भव बंधन से करते सबका उद्धार॥

॥ चौपाई ॥
जयति जयति श्री राहु दयाला।
सदा भक्तन के संकट हारा॥
सर्पाकार, फणी धर शेषा।
राहु देव, संकट हरनेवाला॥
सिर कटे पर धड़ ना छोड़ा।
अमृत पान किया संत मोड़ा॥
राहु केतु, कालग्रह जाने।
सभी संकटों को दूर भगाने॥
सर्पाकार, छाया ग्रह माने।
सभी जनों के दुख हर जाने॥
केतु राहु संग्राम मचाया।
देवताओं को भी डराया॥
भानु ग्रास, चंद्र को धाया।
सभी ग्रहों पर प्रभाव दिखाया॥
राहु-केतु छाया ग्रह भारे।
सभी ग्रहों में राहु न्यारे॥
राहु दोष जो जनम कुंडली।
राहु चालीसा करें निरंतर॥
जीवन में सभी कष्ट मिटावे।
राहु देव कृपा बरसावे॥
भक्त जो राहु देव को ध्यावे।
सभी संकटों को हर लावे॥
राहु ग्रह का प्रभाव हटावे।
सभी जनों को सुख दिलावे॥
कालसर्प दोष भी टारे।
राहु चालीसा जो जन गावे॥
राहु ग्रह के मंत्र जपे जो।
जीवन में सब सुख पावे सो॥
शत्रु से जो भयभीत होवे।
राहु देव का ध्यान धरावे॥
राहु देव की शरण जो आवे।
सभी कष्टों से मुक्ति पावे॥
राहु देव का ध्यान लगावे।
जीवन में सुख शांति पावे॥
राहु देव का यश गावे।
सभी संकट दूर भगावे॥
भक्ति भाव से राहु देव को।
जो भी भक्त सुमिरे मन में॥
सभी संकट, कष्ट मिटावे।
राहु देव कृपा बरसावे॥
राहु देव की शरण जो आवे।
जीवन में सभी सुख पावे॥
राहु देव का यश गावे।
सभी संकट दूर भगावे॥
कृपा दृष्टि राहु देव की।
जो भी भक्त मन में ध्यावे॥
राहु देव के चरणों में।
सभी भक्त शीश नवावे॥
भानु चंद्र जो राहु ग्रसे।
सभी ग्रहों पर राहु बसे॥
राहु देव की महिमा न्यारी।
सभी ग्रहों में राहु भारी॥
सर्पाकार राहु देव का।
जो भी भक्त सुमिरे मन में॥
राहु ग्रह का दोष मिटावे।
सभी जनों को सुख दिलावे॥
कृपा दृष्टि राहु देव की।
सभी भक्तों को सुख पावे॥
(ये तीन छंद दोहराए गए हैं)

॥ दोहा ॥
नमो नमो श्री राहु सुखकारी।
सभी कष्टों को हरने वाले, भक्तों को सुख देने वाले॥
जयति जयति श्री राहु महाराज।
भव बंधन से करते सबका उद्धार॥

॥ इति संपूर्णंम् ॥

श्री राहु चालीसा का अर्थ

राहु देव छाया ग्रह हैं, जो भक्तों के जीवन में आने वाले कष्टों और बाधाओं को दूर करते हैं। उनकी कथा राहु के अद्वितीय बल और शक्ति को दर्शाती है, जैसे अमृत पान की घटना और सूर्य व चंद्र ग्रहण पर उनका प्रभाव।

राहु देव की कृपा से भक्तों को जीवन में शांति और समृद्धि प्राप्त होती है। उनका ध्यान और चालीसा का पाठ राहु ग्रह से संबंधित दोषों को शांत करता है। उनकी पूजा से कालसर्प दोष और शत्रु बाधा जैसी समस्याओं का समाधान होता है।

राहु चालीसा के लाभ

  • कालसर्प दोष का निवारण: राहु चालीसा का पाठ कालसर्प दोष को शांत करता है।
  • संकट निवारण: यह पाठ जीवन के हर प्रकार के संकटों को दूर करता है।
  • आर्थिक समृद्धि: राहु देव की कृपा से धन और समृद्धि प्राप्त होती है।
  • मानसिक शांति: चालीसा का पाठ मानसिक शांति और ध्यान में स्थिरता लाता है।
  • शत्रु बाधा नाश: राहु चालीसा शत्रु से उत्पन्न भय और बाधाओं को समाप्त करता है।
  • सकारात्मक ऊर्जा: उनकी पूजा से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और संतोष का संचार होता है।
  • स्वास्थ्य लाभ: राहु देव की कृपा से शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
  • करियर: करियर और नौकरी में आ रही रुकावटें समाप्त होती हैं।

राहु देव की पूजा विधि

पूजा का समय और अवसर

  • शनिवार और बुधवार के दिन विशेष माने जाते हैं।
  • प्रातः काल और संध्या का समय पूजा के लिए आदर्श होता है।
  • सूर्य और चंद्र ग्रहण के समय राहु देव की पूजा विशेष फलदायी होती है।
  • राहु काल के समय में उनकी पूजा और चालीसा का पाठ प्रभावी होता है।

पूजा सामग्री

  • राहु यंत्र या राहु देव की प्रतिमा।
  • नीले या काले रंग के पुष्प।
  • काले तिल, गुड़, और सरसों का तेल।
  • दीपक, धूप, और अगरबत्ती।
  • काले वस्त्र और लौंग।
  • गंगाजल और चंदन।
  • उड़द की साबुत दाल।

पूजा प्रक्रिया

  1. पूजा स्थल को स्वच्छ करें और राहु यंत्र या प्रतिमा स्थापित करें।
  2. सरसों के तेल का दीपक जलाएं और गंगाजल से अभिषेक करें।
  3. नीले पुष्प, काले तिल, लौंग और चंदन अर्पित करें।
  4. राहु मंत्र का (जैसे बीज मंत्र) 108 बार जाप करें।
  5. इसके पश्चात राहु चालीसा का श्रद्धा और एकाग्रता के साथ पाठ करें।
  6. अंत में गुड़ और तिल का भोग लगाएं, आरती करें और प्रसाद वितरित करें।

राहु देव के मंत्र

बीज मंत्र

“ॐ भ्रां भ्रीं भ्रौं सः राहवे नमः।”

राहु गायत्री मंत्र

“ॐ नागध्वजाय विद्महे पद्महस्ताय धीमहि। तन्नो राहुः प्रचोदयात्।”

महामंत्र

“ॐ राहवे नमः।”

राहू स्तोत्रम् (स्कन्दपुराण)

यह एक अत्यंत प्रभावशाली वैदिक स्तोत्र है, जो विशेष रूप से राहु ग्रह की शांति और अनिष्ट प्रभावों के निवारण हेतु रचा गया है। इसमें राहु के 25 शक्तिशाली नामों का वर्णन है।

राहुर्दानवमंत्री च सिंहिकाचित्तनन्दन: ।
अर्धकाय: सदा क्रोधी चन्द्रादित्य विमर्दन: ।। 1 ।।
रौद्रो रूद्रप्रियो दैत्य: स्वर्भानु र्भानुभीतिद: ।
ग्रहराज सुधापायी राकातिथ्यभिलाषुक: ।। 2 ।।
कालदृष्टि: कालरूप: श्री कण्ठह्रदयाश्रय: ।
बिधुंतुद: सैंहिकेयो घोररूपो महाबल: ।। 3 ।।
ग्रहपीड़ाकरो दंष्टो रक्तनेत्रो महोदर: ।
पंचविंशति नामानि स्म्रत्वा राहुं सदानर: ।। 4 ।।
य: पठेन्महती पीड़ा तस्य नश्यति केवलम् ।
आरोग्यं पुत्रमतुलां श्रियं धान्यं पशूंस्तथा ।। 5 ।।
ददाति राहुस्तस्मै य: पठेत स्तोत्र मुत्तमम् ।
सततं पठेत यस्तु जीवेद्वर्षशतं नर: ।। 6 ।।
।। इति श्रीस्कन्दपुराणे राहुस्तोत्रं संपूर्णम् ।।

राहु स्तोत्र के लाभ

  • कुंडली में राहु की दशा, महादशा या अंतर्दशा से संबंधित दोषों से मुक्ति मिलती है।
  • मानसिक भ्रम, तनाव और नकारात्मक सोच को दूर कर मन को शांत और स्थिर करता है।
  • टोना-टोटका, बुरी दृष्टि, तांत्रिक बाधा या अदृश्य भय से बचाव होता है।
  • कोर्ट-कचहरी, मुकदमे, और विवादों में आ रही अड़चनों से छुटकारा मिलता है।
  • अचानक होने वाली घटनाओं, दुर्घटनाओं और आकस्मिक हानि से रक्षा करता है।

राहु ग्रह कवच (महाभारत)

यह कवच महाभारत से है और राहु ग्रह को शांत करने के सबसे सरल उपायों में से एक है। यह कवच शरीर के सभी अंगों की राहु से रक्षा करने की प्रार्थना है।

अस्य श्रीराहुकवचस्तोत्रमंत्रस्य चंद्रमा ऋषिः ।
अनुष्टुप छन्दः । रां बीजं । नमः शक्तिः ।
स्वाहा कीलकम् । राहुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥
प्रणमामि सदा राहुं शूर्पाकारं किरीटिन् ॥
सैन्हिकेयं करालास्यं लोकानाम भयप्रदम् ॥ १ ॥
निलांबरः शिरः पातु ललाटं लोकवन्दितः ।
चक्षुषी पातु मे राहुः श्रोत्रे त्वर्धशरीरवान् ॥ २ ॥
नासिकां मे धूम्रवर्णः शूलपाणिर्मुखं मम ।
जिव्हां मे सिंहिकासूनुः कंठं मे कठिनांघ्रीकः ॥ ३ ॥
भुजङ्गेशो भुजौ पातु निलमाल्याम्बरः करौ ।
पातु वक्षःस्थलं मंत्री पातु कुक्षिं विधुंतुदः ॥ ४ ॥
कटिं मे विकटः पातु ऊरु मे सुरपूजितः ।
स्वर्भानुर्जानुनी पातु जंघे मे पातु जाड्यहा ॥ ५ ॥
गुल्फ़ौ ग्रहपतिः पातु पादौ मे भीषणाकृतिः ।
सर्वाणि अंगानि मे पातु निलश्चंदनभूषण: ॥ ६ ॥
राहोरिदं कवचमृद्धिदवस्तुदं यो ।
भक्ता पठत्यनुदिनं नियतः शुचिः सन् ।
प्राप्नोति कीर्तिमतुलां श्रियमृद्धिमायु
रारोग्यमात्मविजयं च हि तत्प्रसादात् ॥ ७ ॥
॥ इति श्रीमहाभारते धृतराष्ट्रसंजयसंवादे द्रोणपर्वणि राहुकवचं संपूर्णं ॥

केतु ग्रह कवच

राहु-केतु को एक ही दैत्य के दो भाग माना जाता है, अतः राहु की शांति के साथ केतु का कवच पाठ भी लाभकारी होता है।

अस्य श्रीकेतुकवचस्तोत्रमंत्रस्य त्र्यंबक ऋषिः ।
अनुष्टप् छन्दः । केतुर्देवता । कं बीजं । नमः शक्तिः ।
केतुरिति कीलकम् I केतुप्रीत्यर्थं जपे विनियोगः ॥
केतु करालवदनं चित्रवर्णं किरीटिनम् ।
प्रणमामि सदा केतुं ध्वजाकारं ग्रहेश्वरम् ॥
चित्रवर्णः शिरः पातु भालं धूम्रसमद्युतिः ।
पातु नेत्रे पिंगलाक्षः श्रुती मे रक्तलोचनः ॥
घ्राणं पातु सुवर्णाभश्चिबुकं सिंहिकासुतः ।
पातु कंठं च मे केतुः स्कंधौ पातु ग्रहाधिपः ॥
हस्तौ पातु श्रेष्ठः कुक्षिं पातु महाग्रहः ।
सिंहासनः कटिं पातु मध्यं पातु महासुरः ॥
ऊरुं पातु महाशीर्षो जानुनी मेSतिकोपनः ।
पातु पादौ च मे क्रूरः सर्वाङ्गं नरपिंगलः ॥
य इदं कवचं दिव्यं सर्वरोगविनाशनम् ।
सर्वशत्रुविनाशं च धारणाद्विजयि भवेत् ॥

राहु दोष शांति के उपाय

ज्योतिषीय उपाय

  • दुर्गा चालीसा का पाठ करना राहु दोष से मुक्ति पाने के लिए शुभ रहता है।
  • शनिवार के दिन एक काले कपड़े में एक पानी वाला नारियल और 11 बादाम रखकर पोटली बनाएं और नदी में प्रवाहित कर दें।
  • रोजाना पक्षियों को बाजरा खिलाने से राहु प्रसन्न होते हैं।
  • शनिवार के दिन किसी चौराहे पर चौमुखी दीया (चार बत्तियों वाला) जलाएं और कुछ मीठा रखें।
  • यदि काम अटकते हैं, तो शुभ कार्य करने से पहले अपने साथ सफेद चंदन रखें या चंदन की माला पहनें।
  • हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करें।
  • शनिवार को शनि मंदिर में तेल का दीपक जलाएं।

भगवान शिव की आराधना (राहु शांति हेतु)

राहु ग्रह भगवान शिवशंकर के परम आराधक हैं। अतः जब राहु परेशान कर रहा हो तो शिवजी की आराधना करनी चाहिए:

  • यदि कुंडली में राहु, चंद्र या सूर्य को दूषित कर रहा हो, तो शिवजी की आराधना करें।
  • सोमवार का व्रत रखें। शाम को शिवजी को दीपक लगाने के बाद सफेद भोजन (खीर, मिठाई) ग्रहण करें।
  • राहु की महादशा में सूर्य, चंद्र या मंगल का अंतर कष्टकारी हो, तो प्रतिदिन शिवजी को बिल्व पत्र चढ़ाकर दुग्धाभिषेक करें।
  • शिव साहित्य जैसे- शिवपुराण आदि का पाठ करना चाहिए।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का नाम जाप लगातार करते रहना चाहिए।
  • राहु की दशा अधिक कष्टकारी हो तब भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिए।
  • भगवान शिव की प्रभु श्रीराम के प्रति परम आस्था है, अतः “राम” नाम का स्मरण भी राहु के संकटों से मुक्ति दिलाता है।

राहु देव की कथा (संक्षिप्त)

समुद्र मंथन के दौरान, दैत्य स्वर्भानु ने देवताओं का वेश धरकर अमृत पान कर लिया। सूर्य और चंद्रमा ने उसे पहचान लिया और भगवान विष्णु को सूचित कर दिया।

भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से उसका सिर धड़ से अलग कर दिया। लेकिन अमृत पी लेने के कारण वह अमर हो गया। सिर वाला भाग ‘राहु’ और धड़ वाला भाग ‘केतु’ कहलाया। इसी बैर के कारण राहु समय-समय पर सूर्य और चंद्रमा को ग्रसने का प्रयास करते हैं, जिसे ‘ग्रहण’ कहा जाता है।

यह पृष्ठ राहु देव से संबंधित विभिन्न स्रोतों से एकत्रित जानकारी को प्रस्तुत करता है।

॥ ॐ राहवे नमः ॥

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